रुद्राक्ष और रत्न – विवेक लक्ष्मण गेजगे

अगर आप के जीवन में बार बार परेशानी आ रही है, तो रुद्राक्ष और रत्न आपकी समस्या को हल कर सकते है। । रुद्राक्ष एक संस्कृत शब्द है रूद्र का अर्थ है शिव और अक्ष का अर्थ है आँख की बून्द. आध्यात्मिक  के रूप से देखा जाए तो ऐसा माना जाता है के रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंख की बून्द से हुई। रुद्राक्ष का महत्व शिव महापुराण, श्रीमद भगवत गीता और उपनिषदों में बताया गया है। प्राचीन काल से योगी और मुनि इसे  पहनते आ रहे है। रुद्राक्ष का उपयोग सुरक्षा कवच के रूप में होता है। इसके धारण करने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा की निर्मिति होती है। भारत में रुद्राक्ष पहनने की प्राचीन परंपरा है। मन्त्र का जाप करने के लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग किया जाता है। रुद्राक्ष की माला को हर समय पहना जा सकता है। लेकिन सोते समय और नहाते समय इसे उतारकर रख देना चाहिए, क्योंकि ये टूट सकता है और पानी में भीगने से खराब हो सकता है। रुद्राक्ष १ से २१ मुख के साथ आते है। रुद्राक्ष की निर्मिति फल के पेड़ से होती। फल के अंदर में गुठली के रूप में रुद्राक्ष पाया जाता है। इसके वृक्ष मुख्य तौर पे इंडोनेशिया में पाए जाते है। इसके साथ ही ये नेपाल, भारत और श्रीलंका में भी पाए जाते है। रुद्राक्ष के वृक्ष की ऊंचाई ५० से २०० फिट तक होती है।  रुद्राक्ष के वृक्ष को पूरी तरह बढ़ने में और फल लगाने में साधारण १० से १२ साल लगते है। कुछ लोग अनैसर्गिक रूप से लकड़ी को आकार देकर भी रुद्राक्ष बनाते है। लेकिन उसे नहीं पहनना चाहिए। पारंपरिक  औषधि निर्मिति में कई रोगों के इलाज में भी रुद्राक्ष का उपयोग किया जाता है। रुद्राक्ष का उपयोग मनुष्य के शारीरिक , मानसिक दुर्बलता को दूर करने के लिए भी होता आया है। कई बीमारियों में रुद्राक्ष का उपयोग वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में भी होता है। रुद्राक्ष मन को शांत रखता है और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ता है। इसे लाल रंग के धागे में या सोने की चेन में भी पहना जा सकता है।  

तनाव से मुक्ति के लिए १०० रुद्राक्ष दानों के माला का उपयोग करना चाहिए। मनोकामना पूर्ति के लिए १४० रुद्राक्ष दानों की माला का उपयोग करना चाहिए। धन प्राप्ति के लिए ६२ रुद्राक्ष दानों की माला का उपयोग करना चाहिए। जिस माला का उपयोग आप जाप करने के लिए करते है उस माला को आप को धारण नहीं करना चाहिए।

इसके साथ ही रत्नों में भी अपनी एक ताकत होती ।हर प्रकार की रत्न की अपनी एक खासियत होती है।  विशिष्ट प्रकार के रत्नों का उपयोग विशिष्ट प्रकार के कारणों से किया जाता है। इसका उपयोग विशेषज्ञों मार्गदर्शन से ही करना चाहिए।

अंकशास्त्र में हर मूलांक के लिए विशिष्ट प्रकार के रुद्राक्ष और रत्न के उपयोग को बताया गया है। हर रुद्राक्ष और रत्न के धारण करने की विशिष्ट विधि और समय होता है। उसके पालन करने पर ही आपके विशिष्ट प्रकार के लाभ प्राप्त होते है।

मूलांक १ – सूर्य ग्रह मूलांक १ के स्वामी माने जाते है। एक मुखी रुद्राक्ष आपके कुंडली में सूर्य ग्रह को मजबूत करता है। माणिक ( Ruby ) को सूर्य का रत्न माना गया है।  रेड गार्नेट या रक्तमणि माणिक का उप रत्न है। मूलांक १ वाले माणिक या रक्तमणि धारण कर सकते है। 

मूलांक २ – मूलांक २ का स्वामी ग्रह चन्द्रमा है। मूलांक २ वाले २ मुखी रुद्राक्ष धारण कर सकते है। मूलांक २ वाले को सफ़ेद मोती धारण कर सकते है। 

मूलांक ३ – मूलांक ३ का बृहस्पति / गुरु स्वामी ग्रह है। मूलांक ३ वाले ५ मुखी रुद्राक्ष धारण कर सकते है। मूलांक ३ वाले पुखराज रत्न ( Yellow Sapphire ) या उपरत्न सुनहला ( Yellow Citrine ) धारण कर सकते है।

मूलांक ४ – मूलांक ४ का स्वामी ग्रह राहु है।  मूलांक ४ वाले ८ मुखी रुद्राक्ष धारण धारण कर सकते है। मूलांक ४ वाले को गोमेद ( Hessonite ) धारण कर सकते है।

मूलांक ५ – मूलांक ५ का स्वामी ग्रह बुध है।  मूलांक ५ वाले ४ मुखी रुद्राक्ष धारण कर सकते है। मूलांक ५ वाले पन्ना ( Emerald ) या ग्रीन अवेंचुरिन धारण कर सकते है। आप लोगो को हिरा भी सुट करता है।

मूलांक ६ – मूलांक ६ का स्वामी ग्रह शुक्र होता है। मूलांक ६ वाले ६ मुखी रुद्राक्ष धारण कर सकते है। मूलांक ६ वाले हिरा धारण कर सकते है। 

मूलांक ७ – मूलांक का ७ का स्वामी ग्रह केतु होता है।  मूलांक ७ वाले ९ मुखी रुद्राक्ष धारण कर सकते है। मूलांक ७ वाले लहसुनिया ( Cats Eye ) धारण कर सकते है। 

मूलांक ८ – मूलांक का ७ का  शनि  स्वामी ग्रह  है।  मूलांक ८  वाले ७ मुखी रुद्राक्ष धारण कर सकते है। मूलांक ८ वाले नीलम ( Blue Sapphire ) या ब्लू अमेथिस्ट धारण कर सकते है। 

मूलांक ९ – मूलांक ९ का  मंगल  स्वामी ग्रह  है।  मूलांक ९ वाले ३ मुखी रुद्राक्ष धारण कर सकते है। मूलांक ९ वाले लाल मुंगा या रात रतुवा ( Carnelian ) धारण कर सकते है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *